
चिंतन;मनुष्य को दुःख देने वाला उसका खुद का संकल्प है..
मनुष्य को दुःख देने वाला उसका खुद का संकल्प है । ऐसा होना चाहिये और ऐसा नहीं होना चाहिये‒यह जो मन की धारणा है, इसी से दुःख होता है । अगर वह संकल्प छोड़ दे तो एकदम योग ( समता ) की प्राप्ति हो जायगी‒ *सर्वसंकल्पसन्न्यासी योगारूढस्तदोच्यते। ( गीता ६/४




















